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जैन समाज की सूची

जैन समाज की सूची 2009

जैसवाल जैन समाज की उत्पत्ति एवं प्राचीनता

इतिहास के पन्नो में

अतीत से ही वर्तमान का निर्माण होता है एवं वर्तमान, भावी निर्माण की आधारशिला है। पूर्व में जो घटनायें घटित हो चुकी हैं, वही इतिहास है। यही इतिहास हम सभी को साहित्य एवं सस्कृति का समुचित ज्ञान कराता है। यह भविष्य के जीवन शैली को प्रभावित कर प्रेरणादायक होता है। कोई भी व्यक्ति या जाति वर्तमान में जैसी है, वह अपने विगत् इतिहास का ही परिणाम है। उसका वास्तविक स्वरूप समझने के लिए उसके पूर्व इतिहास की समुचित व क्रमवद्ध जानकारी परमावश्यक है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक व्यक्ति अपना समुदाय अपने पूर्वजों का इतिहास जानने के लिए स्वभावतः उत्सुक व जिज्ञासु होता है।

जैसवाल जैन समाज प्रायः पूर्णतः दिगम्वर शुद्ध तेरहपंथी आम्यान का अनुयायी है और संख्या में बहुत अधिक नहीं हैय़ यह समाज आगरा, मथुरा, अलीगढ, एटा मैनपुरी, इटावा, ग्वालियर, राजखेडा, भरतपुर आदि जिलों में केन्द्रित है। लेकिन वर्तमान में अन्य स्थानों जैसे दिल्ली, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर में भी निवास कर रहा है। यह समाज व्यवसाय के क्षेत्र में भी है तथा शिक्षित होकर विभिन्न उच्च पदों पर भी आसीन है। समाज के विभिन्न पूज्य आचार्य, मुनि, आर्यिकायें एवं अन्य त्यागीवृन्द व विद्वान भी हुए हैं वर्तमान नवीन पीढ़ी के सम्मुख कुछ जिज्ञासा है –

हम कौन हैं ? हम कहाँ से आये ? हमारे पूर्वजों की उपलब्धियाँ क्या हैं ? हम क्यों विभाजित हो गये ? क्या जायसवाल और जैनी जैसवाल में कोई सम्बन्ध है ? अव हमारी भूमिका क्या है ? जैसवाल जैन समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष संस्थाओं ने भी विभिन्न शौध समितियाँ बनाकर उस वृहद क्षेत्र में कार्य करवाने का विचार तो किया लेकिन खेद का विषय है कि कुछ न हो सका। इस विषय के ज्ञातकर समाज के सम्मुख लाया जाना चाहिए।