अखिल भारतवर्षीय जैसवाल जैन महासभा

अखिल भारतवर्षीय जैसवाल जैन महासभा सम्पूर्ण भारतवर्ष एवं विदेशों में निवास कर रहे जैसवाल जैनों (तरौंचिया जैसवाल जैन) का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र संस्था है। यह एक प्रगतिशील, रचनात्मक एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ उत्तदायित्व का निर्वाह करने वाली संस्थाओं में से एक है। आज तरौचिया जैसवाल जैन समाज सामाजिक तथा आर्थिक द़ष्टि से प्रगतिशील समाज की श्रेणी में है।  अधिक जानें

जैन शब्द जिन शब्द से बना है। जिन बना है 'जि' धातु से जिसका अर्थ है जीतना। जिन अर्थात जीतने वाला। जिसने स्वयं को जीत लिया उसे जितेंद्रिय कहते हैं।

मन्दिर जी में प्रवेश करते समय शुद्ध छन जल से पैर धोने चाहिए। घंटा बजाना चाहिए, क्येांकि - घंटा मंगल धवनी के प्रतीक रूप में बजाय जाता है घंटे की ध्वनी सुनकर दूर के लोगों को भी मन्दिर जी का स्मरण होा जाता ळै। इसकी मंगल ध्वनी हमारा मानसिक प्रदूषण दूर करती है।

संपूर्ण जैन समाज का यह महाकुंभ पर्व है। यह जैन एकता का प्रतीक पर्व है। जैन लोग इसे  सर्वाधिक महत्व देते हैं। संपूर्ण जैन समाज इस पर्व के अवसर पर जागृत एवं साधनारत हो  जाता है। दिगंबर परंपरा में इसकी 'दशलक्षण पर्व' के रूप में पहचान है। उनमें इसका प्रारंभिक  दिन भाद्र व शुक्ल पंचमी और संपन्नता का दिन चतुर्दशी है।

jain pooja

संस्कृत में पूजा शब्द जिस धातु से बना है वह ‘‘पू’’ जिसके कई अर्थ हैं एक अर्थ पवित्र होना, अर्थात पवित्र होने की जो जननी हो वह पूजा है या पवित्रता का जो जन कहो वह पूजा या पवित्रता को जन्म दे वह पूजा है। ‘‘पू’’ का दूसरा अर्थ मांजना भी है या देह के साथ-2 राग द्वेष से मलिन आत्मा को मांजना पूजा है। ‘पू’ का तीसरा अर्थ फटकना भी है। अर्थात जिस प्रकार फटक क रदालअलग व छिलका अलग किया जाता है उसी प्रकार देह अलग और आत्मा अलग करना पूजा है।

parushan parv

जैनियों का विश्वास है कि तीर्थंकरों के प्रभाव से मनुष्य का जीवन अर्थपूर्ण और सत्य के अधिक निकट हो जाता है। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य भी लोगों तक जैन तींर्थंकरों के संदेश को पहुंचाना है।

अखिल भारतवर्षीय जैसवाल जैन

अखिल भारतवर्षीय जैसवाल जैन महासभा सम्पूर्ण भारतवर्ष एवं विदेशों में निवास कर रहे जैसवाल जैनों का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र संस्था है।


ESSENCE OF JANISIM

नवकार मंत्र

णमोअरिहंताणं। णमो सिद्धाणं।
णमोआयरियाणं।णमोउवज्झायाणं।
णमोलोए सव्वसाहूणं।
एसोपंचणमुक्कारो, सव्वपावप्पणासणो।
मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं।।

Namokar Mantra destroys all the sins and is supremely auspicious. Auspicious are the Arhats, Siddhas, Saints and the code of conduct (Dharma) preached by them. The Namokar MahaMantra is the supreme Mantra, the bestower of all that is auspicious and worthy. This Mantra also liberates the soul from the worldly sojourn. The chanting of the Mantra itself brings in peace and joy.

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